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अगस्त माह - भाग 1 : BRD मेडिकल कॉलेज मामला, कैसा रहा पूरा घटनाक्रम

'अगस्त महीने में बच्चे अधिक मरते हैं'


अगस्त माह की 11 तारीख। शाम के करीब साढ़े सात बजे के आस-पास। ई-मेल पर एक ब्रेकिंग आती है। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 20 बच्चों की मौत। ये खबर दिखते ही न्यूजरूम में अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है। वजह साफ थी। ये एक गंभीर घटना थी जो कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में घटी थी।

इससे पहले भी 10 अगस्त को इसी वजह से 7 बच्चों की मौत हुई थी और ये संख्या 11 अगस्त को बढ़ गई थी। मामला इतना बड़ा था तो जाहिर सी बात है ख़बर लखनऊ तो पहुंचनी ही थी। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच कराने की बात कही। बच्चों की मौत को घंटों बीत चुके थे, लेकिन तब तक उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह न तो मीडिया के सामने आए थे और न ही अस्पताल पहुंचे थे। 


सुबह होते-होते यानि कि 11 अगस्त की रात खत्म होने तक, अस्पताल में मरने वाले बच्चों की संख्या 34 हो गई थी। इसके बाद तक बच्चों की मौत का सिलसिला नहीं रूका। 12 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि 9 जुलाई और 9 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब बीआरडी मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था तब वहां ऑक्सीजन की कमी की कोई शिकायत नहीं आई थी। 

स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हमने पूरी रिपोर्ट देखी है। बच्चों की मौत अलग-अलग वजहों से हुई है। किसी बच्चे को लीवर प्रॉब्लम थी तो किसी को अलग समस्या। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने यह तक भी कहा कि जो बच्चे 10 अगस्त को मरे हैं और जिनकी मौत 11 अगस्त को हुई है, उनकी वजहें अलग-अलग हैं। इनकी वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं है।



मंत्री सिद्धार्धनाथ सिंह का बयान...


हालांकि, सरकारी बयानबाजी के बीच 11 अगस्त के बाद और घटना के पांच दिन के अंदर 63 बच्चों की मौत हो चुकी थी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया। 12 अगस्त को चल रही ख़बरों में अचानक से डॉक्टर कफील का नाम सामने आने लगा। डॉक्टर कफील को हीरो बना दिया गया। खबरों की मानें तो डॉक्टर कफील ने ऑक्सीजन की कमी होने के बाद एसएसबी से संपर्क साधा था और मोटरसाइकिल से डीआईजी के पास पहुंचे थे। जहां उनको मदद मिली और कुछ ऑक्सीजन सिलेंडर एसएसबी ने मुहैया करा दिए। साथ में एक ट्रक भी भेजा गया, जिससे कि वे ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था कर सकें।


दो दिन भी नहीं बीता था कि वही डॉक्टर कफील खलनायक घोषित कर दिये गए। कहा जाने लगा कि कफील ने बच्चों को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं कराई। यह ख़बर अब बड़ी हेडलाइन्स के साथ आने लगी। इलस ख़बर के आते ही डॉक्टर कफील को भी निलंबित कर गिरफ्तार करने की कार्रवाई की गई। पूरे मामले में जांच होती रही। इस बीच डॉक्टर कफील ने अपना पक्ष रखा। कुछ दिन न्यायिक प्रकिया के बीच डॉक्टर कफील को जमानत मिल गई। अभी हाल ही में इनके भाई पर गोली चलाई गई है। इस मामले में पुलिस जांच कर रही है।

ये आंकड़े 30 जून तक के हैं।

मीडिया के सामने आए डॉक्टर कफील...


एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त माह में 418, सितम्बर में 431 और अक्टूबर में 457 बच्चों की मौत हुई थी। वहीं, डॉक्टर कफील ने आरोप लगाते हुए एक वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने अपनी जान का खतरा बताया था। उन्होंने वीडियो में कहा था कि इस मामले में उनका कोई कसूर नहीं है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। लेकिन, अभी तक इस मामले में न कोई गंभीर जांच ही पता चली है और न ही कोई आरोप ही सिद्ध हो सके हैं। हालांकि, ऑक्सीजन उपलब्ध कराने वाली एजेंसी पर भी मामूली कार्रवाई हो सकी है।

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