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इरफ़ान ख़ान : एक अभिनेता जो अभिनय में खुद को झोंककर किरदार में जान डाल देता है


'देखो सुनो, लड़की जो है आदमी से प्यार करती है। आदमी में अगर वीरता नहीं है तो आदमी, आदमी नहीं है। लड़की के सामने उन लौंडों ने तुमको मारा और तुमने कुछ नहीं किया तो लड़की समझेगी कि लड़का प्यार तो करता है, सुरक्षा नहीं दे सकता।'

ऐसे ही कुछ दमदार डायलॉग्स से अपने दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाला कलाकार। वो कलाकार जो सिर्फ कलाकारी ही नहीं करता बल्कि अपने किरदार में जान फूंक देता है। उसकी अदायगी ऐसी कि लगता ही नहीं हम एक एक्ट देख रहे हैं। हमें लगता है कि यह सच्ची घटना है जो एक आदमी के साथ घट रही है।

एक दिग्गज कलाकार। नाम है इरफ़ान खान। ये नाम तो सुना ही होगा। इरफ़ान खान ऐसे अभिनेता हैं जिनका होना किसी फिल्म मे जान भर देता है। उनका होना फिल्म में ऐसा होता है कि पूरी फिल्म उन्हीं के इर्द-गिर्द लिखी गई है। ये कलाकार अपनी कलाकारी अपने अभिनय से ही पहचाना जाता है। तभी तो सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं बल्कि हॉलीवुड वालों ने भी इरफ़ान को अपनी फिल्में ऑफर कीं।

इरफ़ान को बचपन में फिल्में देखने की इजाजत नहीं थी। जब चाचा घर पर आते थे तो उम्मीद होती थी कि वो सिनेमा दिखाने ले जाएंगे। और, वे पूरे खानदान को एकसाथ फिल्म दिखाने ले जाते थे। हीरो बनने का भी भूत तभी सवार हुआ था इरफान पर। किसी ने कह दिया कि तुम्हारी शक्ल तो मिथुन चक्रवर्ती से मिलती है। इस बात से ऐसा कॉन्फिडेंस जगा कि बंदे ने हीरो बनना ठान लिया। फिर साथियों ने सलाह दी और ये भूत उतारने इरफ़न चल दिए एनएसडी। नेशनस स्कूल ऑफ ड्रामा, दिल्ली।


लंबे जद्दोजहद के बाद, यानि एनएसडी से मुंबई आने के बाद, जहां काम तो मिल रहा था, लेकिन ऐसा काम नहीं मिल रहा था जिसमें मजा आ जाए, तब 2001 में एक ऐसा काम मिला जिसने इरफ़न को इरफ़ान के तौर पर स्थापित करने में मदद की। जिसका नाम था 'द वॉरियर'। इरफ़ान बताते हैं कि उन्हें यहां नहीं सोचना पड़ रहा था कि चैनल का नाम न खराब हो जाए, पैसै ज्यादा खर्च हो रहे हैं, जैसी बातें। फिर 2003 में आई 'हासिल' में जाकर इरफ़ान को वैसा काम मिला, जिसमें वो अपने अभिनय को अभिव्यक्त कर सकते थे। किरदार का नाम था रणविजय सिंह।

इरफ़ान ने इन दिनों में चाणक्य, चंद्रकांता जैसे टीवी धारावाहिकों में भी काम किया था। आज इरफ़ान खान अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने खुद को बहुत ही ज्यादा ख़राब हालत में बताया है। इरफान खान इन दिनों लंदन में हैं और अपनी बीमारी न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर का इलाज करा रहे हैं। इसी बीच उन्होंने एक इंटरव्यू दिया है। उन्होंने कहा है कि 'मैं कीमो साइकिल के चौथे चरण में हूं, कुल 6 चरण होने हैं और उसके बाद स्कैन किया जाएगा। कीमो साइकिल के तीसरे चरण के बाद स्कैन पॉजिटिव था लेकिन अभी हमें 6 चरणों तक स्कैन को देखना होगा। उसके बाद पता चलेगा कि आगे क्या होता है। किसी के साथ भी मेरी जिंदगी की कोई गारंटी नहीं है।'


इरफ़ान ने एक इण्टरव्यू में कहा है कि 'मेरा दिमाग हमेशा ये बात मुझसे कहता है कि मुझे यह बीमारी है और मैं कुछ ही महीनों या एक साल या दो साल में मर सकता हूं। या फिर मैं इन सब बातों को पूरी तरह अनदेखा करके जिंदगी जिस ओर मुझे ले जाती है मैं वैसे ही जिऊं। जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं मानता हूं कि मैं अंधों की रेस में था। जहां मुझे काफी कुछ मिल रहा था लेकिन मैं देख नहीं सका।'

उन्होंने कहा है कि 'आप अपने बारे में चिंता करना बंद कर दें, आप प्लानिंग करना बंद कर दें, आप शोर बंद कर दें। आप दूसरा पक्ष भी देखें। यह जिंदगी आपको बहुत कुछ देती है और बहुत कुछ देने के लिए है इसलिए मैं कहता हूं कि मेरे पास शब्द नहीं है लेकिन शुक्रिया। मेरे पास बोलने के लिए दूसरे शब्द नहीं हैं, दूसरी इच्छा नहीं है, दूसरी कोई प्रार्थना नहीं है।'


जब इरफान खान से पूछा गया कि 'क्या वो अभी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं?' उन्होंने कहा कि 'नहीं मैं इस वक्त कोई स्क्रिप्ट नहीं पढ़ रहा हूं। मैं अभी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा हूं। अभी मैं कोई प्लान नहीं कर रहा हूं। मैं ब्रेकफास्ट के लिए जाता हूं और उसके बाद मेरे पास कोई प्लान नहीं होता है। मैं चीजों को उसी तरह ले रहा हूं जैसे वो मेरे पास आ रही हैं।'





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