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बात गुलजार साहब और जगजीत साहब की : पार्ट-1


शुरूआत जगजीत साहब से करते हैं और फिर आगे बढ़ता जाएगा ये कारवां:

जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी, 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से पंजाब के रोपड़ जिले से था। जगजीत की शुरुआती शिक्षा गंगानगर में हुई और बाद में उन्होंने जालंधर में पढ़ाई की। पिता सरदार अमर सिंह धमानी एक सरकारी कर्मचारी थे। 

जगजीत सिंह को संगीत उनके पिता से ही विरासत में मिला। वह 1965 में मुंबई आ गए थे। 1967 में उनकी मुलाकात ग़ज़ल गायिका चित्रा से हुई। इसके दो साल बाद 1969 में दोनों विवाह बंधन में बंध गए।



जगजीत-चित्रा ने साथ में कई ग़ज़लें गाईं। दोनों संगीत कार्यक्रमों में अपनी जुगलबंदी से समां बांध देते। इस जोड़ी का एक बेटा विवेक था, जिसकी वर्ष 1990 में एक कार हादसे में मौत हो गई। उस समय उसकी उम्र 18 साल की ही थी। इकलौते बेटे की असमय मौत ने चित्रा को पूरी तरह तोड़ दिया और उन्होंने गायकी से दूरी बना ली। जगजीत को करीब से जानने वालों का मानना है कि उनकी ग़ज़लों में महसूस होने वाली तड़प व दुख उनकी इसी अति निजी क्षति की वजह से था।

कुछ गजलें पढ़िएगा? पढ़िए...

(1)

शाम से आँख में नमी सी है,
आज फ़िर आपकी कमी सी है,

दफ़न कर दो हमें की साँस मिले,
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है,

वक्त रहता नहीं कहीं छुपकर,
इसकी आदत भी आदमी सी है,

कोई रिश्ता नहीं रहा फ़िर भी,
एक तस्लीम लाज़मी सी है,

(2)

जगजीत
                
एक बोछार था वो ..
एक बोछार था वो शख्स,
                बिना बरसे किसी अब्र की सहमी सी नमी से
     जो भिगो देता था...
         
 एक बोछार ही था वो,
                जो कभी धूप की अफशां भर के
                दूर तक, सुनते हुए चेहरों पे छिड़क देता था
                नीम तारीक से हॉल में आंखें चमक उठती थीं

                सर हिलाता था कभी झूम के टहनी की तरह,
                लगता था झोंका हवा का था कोई छेड़ गया है
                
गुन्गुनाता था तो खुलते हुए बादल की तरह
                मुस्कराहट में कई तरबों की झनकार छुपी थी
                गली क़ासिम से चली एक ग़ज़ल की झनकार था वो
                एक आवाज़ की बोछार था वो !!


ये है वीडियो 'कोई बात चले', हेडफोन लगाइये मन से सुनिए...

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