कैराना लोकसभा उपचुनाव परिणाम भाजपा को अपनी अहमियत याद दिलाता है
महागठबंधन क्या इतना मजबूत है कि कैराना में हिन्दुत्व कार्ड भी फेल हो गया?
| फोटो- साभार सोशल मीडिया। |
कैराना लोकसभा में उपचुनाव ने एक बात तो साबित कर दी है कि भाजपा कुछ भी कोशिश कर ले, हार ही मिलेगी। वह रुतबा अब नहीं रह गया है जो 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान था. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कोई भी प्रयास उन्हें पहले जैसी सफलता दिलाने में नाकामयाब रहा.
एक बात पर गौर किया जाय को ये हार महागठबंधन की मजबूत स्थिति प्रदर्शित करती है. इस चुनाव के बाद यह और भी साफ हो जाता है कि उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 73 सीटें जीतकर सत्ता में आना अब भाजपा के लिए बहुत ही मुश्किल काम होगा. गठबंधन ने जो ताकत दिखाई है वह कर्नाटक में भी हमें देखने को मिली. गठबंधन ने जो ताकत दिखाई है वह कर्नाटक में भी हमें देखने को मिली. ये बात तय है कि ये विपक्षी पार्टियां जबतक एक साथ मैदान में आएंगी भाजपा को मुह की खानी पड़ेगी।
| मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ। |
ये रहा है योगी आदित्यनाथ का रिकॉर्ड
साल 1969 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में सत्ताधारी दल को हार का सामना करना पड़ा था. उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. 1989 से योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री चुने जाने तक गोरखपुर सीट पर गोरखनाथ मठ का भगवा परचम लहराता रहा है. 1989 से 2014 के लोगसभा चुनावों तक इस सीट पर महंत अवैद्यनाथ के बाद योगी आदित्यनाथ चुनाव मैदान में रहते थे.
पिछले 28 सालों से गोरखपुर लोकसभा सीट भाजपा की परंपरागत सीट रही है. 1991 से चाहे वो अवैद्यनाथ हों या फिर योगी आदित्यनाथ, दोनों भाजपा के ही टिकट पर यहां चुनाव लड़े हैं.
साल 1969 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में सत्ताधारी दल को हार का सामना करना पड़ा था. उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. 1989 से योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री चुने जाने तक गोरखपुर सीट पर गोरखनाथ मठ का भगवा परचम लहराता रहा है. 1989 से 2014 के लोगसभा चुनावों तक इस सीट पर महंत अवैद्यनाथ के बाद योगी आदित्यनाथ चुनाव मैदान में रहते थे.
पिछले 28 सालों से गोरखपुर लोकसभा सीट भाजपा की परंपरागत सीट रही है. 1991 से चाहे वो अवैद्यनाथ हों या फिर योगी आदित्यनाथ, दोनों भाजपा के ही टिकट पर यहां चुनाव लड़े हैं.
| फोटो-साभार सोशल मीडिया। |
योगी के नेतृत्व में हार रहे हैं उपचुनाव
वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर सीट ख़ाली हो गई थी. इलाहाबाद में फूलपुर के साथ गोरखपुर सीट पर बीते 11 मार्च को उपचुनाव हुए थे. फूलपुर लोकसभा सीट केशव प्रसाद मौर्य के उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की वजह से ख़ाली हुई थी. बीते बुधवार को हुई मतगणना के बाद भाजपा को दोनों ही सीटों पर हार का सामना करना पड़ा.
वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर सीट ख़ाली हो गई थी. इलाहाबाद में फूलपुर के साथ गोरखपुर सीट पर बीते 11 मार्च को उपचुनाव हुए थे. फूलपुर लोकसभा सीट केशव प्रसाद मौर्य के उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की वजह से ख़ाली हुई थी. बीते बुधवार को हुई मतगणना के बाद भाजपा को दोनों ही सीटों पर हार का सामना करना पड़ा.
पढ़ें- जब राज्यसभा की जीत ने गोरखपुर की हार को फीका कर दिया!
कैराना लोकसभा सीट पर क्यों है सबकी नजर
यह उपचुनाव कैराना लोकसभा सीट से भाजपा सांसद रहे हुकुम सिंह के निधन के बाद हो रहा है. ऐसे में भाजपा ने उनकी बेटी मृगांका सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है. योगी आदित्यनाथ के चुनाव क्षेत्र गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के फूलपुर में हार के बाद कैराना का उपचुनाव भाजपा के लिए बहुत ही अहम हो गया है.
इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय और राज्य के कई मंत्री, सांसद, विधायक और दूसरे बड़े नेता भी लगातार कैराना में चुनाव प्रचार में लगे रहे.
कैराना लोकसभा सीट पर क्यों है सबकी नजर
यह उपचुनाव कैराना लोकसभा सीट से भाजपा सांसद रहे हुकुम सिंह के निधन के बाद हो रहा है. ऐसे में भाजपा ने उनकी बेटी मृगांका सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है. योगी आदित्यनाथ के चुनाव क्षेत्र गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के फूलपुर में हार के बाद कैराना का उपचुनाव भाजपा के लिए बहुत ही अहम हो गया है.
इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय और राज्य के कई मंत्री, सांसद, विधायक और दूसरे बड़े नेता भी लगातार कैराना में चुनाव प्रचार में लगे रहे.
| फोटो- साभार गूगल। |
यहां तक कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मई को कैराना से सटे बागपत में एक रैली भी की. आरएलडी ने इस पर चुनाव आयोग से आपत्ति भी जताई. उसका कहना था कि यह कैराना चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है, लेकिन चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.
शिवसेना ने योगी को 'ढोंगी' कहा है
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र में 'खंजर, विश्वासघात और योगी की चप्पल' नामक शीर्षक के तहत संपादकीय लिखा है, जिसमें कहा गया है कि ढोंगी योगी आदित्यनाथ पालघर लोकसभा उपचुनाव में रैली करने आए थे.
शिवसेना ने योगी को 'ढोंगी' कहा है
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र में 'खंजर, विश्वासघात और योगी की चप्पल' नामक शीर्षक के तहत संपादकीय लिखा है, जिसमें कहा गया है कि ढोंगी योगी आदित्यनाथ पालघर लोकसभा उपचुनाव में रैली करने आए थे.
| फोटो- साभार गूगल। |
क्या आज भी जिंदा है दंगे का काला सच?
वर्ष 2013 में हुए मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगे के दौरान शामली जनपद के कई गांव भी प्रभावित हुए थे. गांव लांक, बहावड़ी, लिसाढ़, हसनपुर आदि में घटनाएं हुई थीं. इन गांवों से पलायन करने वाले लोग कांधला और कैराना क्षेत्र में जाकर बस गए थे.
वर्ष 2013 में हुए मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगे के दौरान शामली जनपद के कई गांव भी प्रभावित हुए थे. गांव लांक, बहावड़ी, लिसाढ़, हसनपुर आदि में घटनाएं हुई थीं. इन गांवों से पलायन करने वाले लोग कांधला और कैराना क्षेत्र में जाकर बस गए थे.
मुज़फ़्फरनगर में हुए दंगों में 60 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और 40,000 से अधिक लोग बेघर हुए थे. इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग का गठन 9 सितंबर 2013 को किया गया था.
Post a Comment