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'टोपी' की राजनीति कहां तक सही है, क्या सच में इसकी जरूरत है?

योगी आदित्यनाथ का टोपी न पहनना कितना सही, कितना गलत!

प्रतीकात्मक चित्र।
28 जून 2018 की बात है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संतकबीरनगर आने वाले थे. नरेंद्र मोदी का यहां आने का कार्यक्रम तय था. लेकिन, बारिश ने थोड़ा सा परेशान कर दिया तो आने का कार्यक्रम गोरखपुर से न होकर लखनऊ से रखा गया.

अब प्रधानमंत्री का आना था तो उनकी सुरक्षा व्यवस्था का पूरा इंतजाम करना था. इलके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद संतकबीरनगर पहुंचे. वहां जहां संत कबीर की मजार है. सीएम योगी आदित्यनाथ जब मजार पर जायजा लेने पहुंचे तो वहां मौजूद मौलाना ने उन्हें पारंपरिक टोपी पहनानी चाही, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने उनका हाथ पीछे करते हुए मना कर दिया.
 
ये ANI का ट्वीटर लिंक हैः


मुख्यमंत्री पद पर आसीन योगी ने एक समुदाय विशेष के संस्कार को तरजीह दी, लेकिन टोपी पहनने से साफ इनकार कर दिया. ऐसा योगी अपने कई भाषणों में कहते रहे हैं कि वे टोपी धारण नहीं करते या टोपी धारण नहीं करेंगे. यहां योगी ने मजार पर टोपी नहीं पहनी तो विपक्षी दलों में हाहाकार मच गया. एक प्रदेश का मुख्यमंत्री समुदाय विशेष की अवहेलना कर रहा है.

साधु संतों एक सम्मेलन में योगी आदित्यनाथ.
 लेकिन, सिर्फ योगी आदित्यनाथ ही नहीं हैं जिन्होंने टोपी पहनने से इनकार किया हो. प्रधानमंत्री मोदी भी ऐसा कर चुके हैं. तब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे. ये बात साल 2013 की है. नरेंद्र मोदी ने अपने राज्य में जनता से सीधे संपर्क के लिए सद्भावना मुहिम छेड़ी हुई थी. अलग-लग धर्मों के प्रतिनिधियों को मंच पर उनसे मुलाकात के लिए लाया जाता था.

मंच पर आने के बाद इन लोगों में मोदी को पारंपरिक वेश जैसे- पगड़ी, साफा या शॉल पेश किया जा रहा था. लेकिन, एक मजार के ट्रस्टी जब अपनी जेब से एक गोल टोपी निकाल कर मोदी को पहनाने के लिए आगे बढ़े तो उन्होंने ट्रस्टी को टोपी पहनाने से रोक दिया. इसके बजाय मोदी ने ट्रस्टी से वो हरा साफा पहनाने को कहा जो उन्होंने अपने गले में डाल रखा था.

टोपी पहनने से इनकार करते नरेंद्र मोदी.
 उस समय मोदी का टोपी न पहनना मुसलमान विरोधी मानसिकता वाला माना जा रहा था. सारे विरोधी दलों ने एकजुट होकर नरेंद्र मोदी की आलोचना की थी. हालांकि ये बात भी कुछ हद तक सत्य है कि मोदी कहीं न कहीं ऐसी छवि खुद बनाने का प्रयास करते हैं. लेकिन, क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का टोपी पहनने से इनकार करना गलत था.

नाथ संप्रदाय में जो परंपरा है उसके अनुसार, कुछ नाथ साधक हिमालय की गुफाओं में चले जाते हैं. हाथ में चिमटा, कमंडल, कान में कुंडल, कमर में कमरबंध, जटाधारी धूनी रमाकर ध्यानमग्न मुद्रा इनकी प्रधान वेश-भूषा है. नाथ योगियों को ही अवधूत या सिद्ध कहा जाता है. ये योगी अपने गले में काली ऊन का एक जनेऊ रखते हैं जिसे 'सिले' कहते हैं. गले में एक सींग की नादी रखते हैं. इन दोनों को 'सींगी सेली' कहते हैं.

गोरखनाथ मठ में आरती करते योगी आदित्यनाथ.
 इसके साथ ही योगी भगवा धारण करते हैं. एक कठिन सधना के बाद उन्हें योग की प्राप्ति होती है. भगवा धारण करना भी आवश्यक परंपरा में ही आता है. इसलिए कोई अन्य वस्त्र धारण करना इस परंपरा के विरुद्ध माना जाता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से आते हैं और वे भी भगवा धारण करते हैं. ऐसे में उन्होंने कोई अन्य वस्त्र धारण नहीं किया. यह छवि उनकी राजनीति में पदार्पण के दौर से ही रही है.

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