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बात गुलज़ार साहब और जगजीत साहब की : पार्ट-2


गुलज़ार और ग़ालिब। ये अपने आप में एक संपूर्ण महाकाव्य रचने वाला तीन शब्दों का वाक्य है। जब बात इनकी चल आती है तो हम बरबस ही याद कर लेते हैं जगजीत सिंह को, जिनके बिना गुलज़ार के कुछ सपने अधूरे से लगते। जैसे इसमें शामिल था दूरदर्शन पर आने वाला कार्यक्रम 'मिर्जा ग़ालिब'।


एलबम लगभग 25 साल के इतिहास में सबसे लोकप्रिय था
'मिर्जा ग़ालिब' गुलजार कृत धारावाहिक था, जो दूरदर्शन के लिए बनाया गया था। इसके साथ ही गुलज़ार ने ग़ालिब के पत्रों को एक म्यजिक एलबम का शक्ल देने की कोशिश की थी। इसके लिए गुलज़ार ने जगजीत सिंह को ही चुना था। इसके पहले भी एक एलबम ग़ालिब पर ही बना, जिसमें जगतीत सिंह और चित्रा की आवाज थी। यह एलबम लगभग 25 साल के इतिहास में सबसे लोकप्रिय था।

तेरा बयान ग़ालिब- vol.1...





नहीं मिल सका गुलज़ार को जगजीत का साथ
जगजीत सिंह का साथ गुलज़ार साहब के साथ अधिक रहा। ये जोड़ी फिल्मी सफर की जय-वीरू वाली जोड़ी मानी जा सकती है। सही मायने में देखें तो आज की पीढ़ी में ग़ालिब के शेर जिंदा रखने वाले जगजीत सिंह और गुलज़ार साहब ही हैं। इन्होंने ग़ालिब के शेर पर बहुत काम किया। याद आया, जब दूसरी बार यानि कि ग़ालिब का दूसरा एलबम गुलज़ार साहब बनाने वाले थे तो उसी दौर में जगजीत सिंह का निधन हो गया था, जिससे कि दूसरा एलबम जगजीत की आवाज में कभी नहीं बनाया जा सका।

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'एक आवाज़ की बौछार था वो शख्स'
फिर, गुलज़ार साहब ने एलबम बनाया। इस एलबम में उन्होंने ग़ालिब के साथ-साथ अपने दोस्त जगजीत सिंह को भी श्रद्धांजलि दी। इसकी शुरुआत गुलज़ार की जगजीत सिंह को समर्पित नज़्म 'एक आवाज़ की बौछार था वो शख्स' से होती है। जगजीत सिंह के व्यक्तित्व और गायकी के विशिष्ट पहलुओं को गुलज़ार ने अपने शब्दों में बहुत खूबसूरती से बांधा है।

तेरा बयान ग़ालिब- vol.2...




जगजीत ने 'मिर्ज़ा ग़ालिब' में खुद को छोड़ दिया या जोड़ दिया था
जगजीत ने धारावाहिक में अपने स्वरों से मिर्ज़ा ग़ालिब को एक अलग अंदाज़ दिया था। इस एलबम में धारावाहिक की मूल एलबम की कुछ नज़्में तो शामिल की ही गई हैं।

  • 'हरेक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है'
  • 'वो फ़िराक़ और वो विसाल कहां'
  • 'दोस्त ग़मखारी में मेरी'
  • 'वो फ़िराक़ और वो विसाल कहां' 
  • 'कासिद के आते-2 ही'
  • 'कब से हूं क्या बताऊं'


उस धारावाहिक के जगजीत के स्वरों में बहुत से अंश मूल एलबम में शामिल नहीं थे, उनको इस एलबम में खूबसूरती से सलीम आरिफ़ ने समाहित किया गया है। रंगमंच के प्रख्यात लेखक-निर्देशक सलीम आरिफ़, जोकि ग़ालिब के खतों को मंच पे पेश करते आये हैं।

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